पिथौरागढ़ जिले के राजकीय इंटर कॉलेज कार्कीनगर की दो बाल वैज्ञानिक छात्राओं ने हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों और जैव विविधता को समझने के लिए अपना शोध कार्य शुरू कर दिया है। यह शोध राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की वर्ष 2026-27 की थीम “सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार” के तहत किया जा रहा है।
इस शोध के लिए छात्राओं ने “सतत विकास हेतु भारतीय ज्ञान प्रणाली का अनुप्रयोग” विषय को चुना है। इसके तहत वे विद्यालय में इको-बॉटेनिकल गार्डन, हिमालयी औषधीय पौधों, स्थानीय जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान का अध्ययन कर रही हैं।
शोध के शुरुआती चरण में छात्राएं अलग-अलग स्थानों पर जाकर पौधों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। वे यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि स्थानीय क्षेत्र में कौन-कौन से औषधीय पौधे पाए जाते हैं, उनका पारंपरिक रूप से किस तरह उपयोग किया जाता है और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए क्या प्रयास किए जा सकते हैं।
इस परियोजना का एक खास उद्देश्य बच्चों को किताबों से बाहर निकलकर अपने आसपास की प्रकृति को समझने का मौका देना भी है। शोध के दौरान छात्राएं पौधों की पहचान, उनके उपयोग और संरक्षण से जुड़ी जानकारी को रिकॉर्ड करेंगी और इसका एक डेटाबेस तैयार करेंगी।
बाल वैज्ञानिक भारतीय ज्ञान परंपरा में मौजूद प्रकृति से जुड़े पारंपरिक अनुभवों को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का भी प्रयास कर रही हैं। इसके जरिए वे यह जानना चाहती हैं कि स्थानीय ज्ञान और आधु








