सितारगंज, 10 सितंबर। 68 दिनों से लापता 13 वर्षीय बालिका की अब तक बरामदगी न होने से नाराज लोगों ने बुधवार को सितारगंज कोतवाली का घेराव किया। भाकपा (माले) के नेतृत्व में लोगों ने मंडी से कोतवाली तक जुलूस निकाला और पुलिस-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने बालिका की जल्द बरामदगी की मांग करते हुए कहा कि इतने लंबे समय बाद भी नाबालिग के संबंध में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। प्रदर्शन के दौरान “पुलिस-प्रशासन होश में आओ, दो माह से अपहृत बालिका का पता लगाओ” और “पोक्सो अपराध के बावजूद पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना रवैया नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाए गए।
पुलिस पर लापरवाही का आरोप
भाकपा (माले) राज्य कमेटी सदस्य आनंद नेगी ने आरोप लगाया कि 68 दिन बीत जाने के बावजूद बालिका और आरोपी का पता नहीं लगा पाना पुलिस की नाकामी है। उन्होंने कहा कि नाबालिग बालिका के मामले में पुलिस को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन परिवार के अनुसार मामले में अपेक्षित प्रयास नहीं किए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा पीड़ित परिवार के साथ भी संवेदनशीलता से व्यवहार नहीं किया जा रहा है।
कोतवाल के कथित बयानों पर जताई नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने कोतवाल से बातचीत के दौरान कथित तौर पर दिए गए कुछ बयानों को लेकर भी नाराजगी जताई। भाकपा (माले) नेताओं के अनुसार बातचीत के दौरान कोतवाल ने बालिका की मां द्वारा उसे भगाने, सबूत उपलब्ध कराने और बालिका की सहमति जैसे सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नाबालिग बालिका के मामले में इस तरह की टिप्पणियां परिवार के प्रति असंवेदनशील रवैये को दर्शाती हैं। मामले को लेकर नेताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष शिकायत करने और संबंधित कोतवाल को हटाने की मांग उठाई।
“नाबालिग की सहमति का सवाल नहीं”
भाकपा (माले) कार्यकर्ता एवं उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन संबद्ध ऐक्टू की जिला उपसचिव अनीता अन्ना ने कहा कि 13 वर्षीय बालिका नाबालिग है और ऐसे मामले में कानून के अनुसार पुलिस को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नाबालिग से जुड़े यौन अपराध के मामलों में बालिका की कथित सहमति को आधार बनाकर जांच को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। अनीता अन्ना ने कहा कि बालिका की तलाश करना और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाना पुलिस की जिम्मेदारी है, न कि पीड़ित परिवार की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को भटकाने के बजाय पुलिस को बालिका की तलाश और आरोपी तक पहुंचने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
पुलिस पर अपराधी को बचाने का आरोप
भाकपा (माले) जिलासचिव ललित मटियाली ने सभा को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस के रवैये से ऐसा प्रतीत होता है कि मामले में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है। उन्होंने पुलिस से बालिका की तत्काल बरामदगी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
कांग्रेस नेता समेत कई लोगों ने दिया समर्थन
आंदोलन को कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधायक नारायण पाल तथा बॉडीबिल्डर मोहित चोपड़ा ने भी समर्थन दिया। उन्होंने बालिका की जल्द बरामदगी और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
प्रदर्शन में ऐक्टू जिला सचिव अनीता अन्ना, आइसा राज्य सचिव धीरज कुमार, भाकपा (माले) नेता विष्णुपद साना और जिशान अली, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष रीता कश्यप, पूर्व जिला सचिव कुलविंदर कौर सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
प्रदर्शन के दौरान गोविंदा, शादाब, कुलदीप सिंह, किसान सभा (लोकतंत्र) के जागीर सिंह, इमरान खान, राशिद, खुशनुमा, जैफ, रहीमा, शबाना, सबीना, सलमान समेत सैकड़ों लोगों ने बालिका की जल्द बरामदगी की मांग उठाई।
नोट: प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए पुलिस पर लापरवाही और अन्य आरोप उनके पक्ष के अनुसार हैं। पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।








