उत्तराखंड के नए राज्यपाल होंगे डॉ. ढाल सिंह बिसेन, जानिए उनके राजनीतिक सफर की पूरी कहानी
देहरादून, 14 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड को नया राज्यपाल मिलने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 12 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया। वह लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का स्थान लेंगे। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, उनकी नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी। <Cite refs={[“turn778011search0″,”turn778011search3”]}/>
मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे डॉ. बिसेन विधायक, मंत्री और सांसद के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। अब उन्हें उत्तराखंड में संवैधानिक प्रमुख की भूमिका निभानी है। उनकी नियुक्ति के साथ ही प्रदेश के नए राज्यपाल को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
14 मई 1952 को हुआ था जन्म
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म 14 मई 1952 को मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि आयुर्वेद और चिकित्सा से जुड़ी रही है। उपलब्ध संसदीय विवरणों के अनुसार, उन्होंने रायपुर के छत्तीसगढ़ आयुर्वेदिक कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की।
चिकित्सा और कृषि से जुड़े अनुभव के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
चार बार विधायक चुने गए
डॉ. बिसेन का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश विधानसभा से आगे बढ़ा। वह 1990 से 2008 के बीच चार कार्यकालों में विधायक रहे। इस दौरान उन्हें राज्य की राजनीति और विधानसभा की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला।
विधानसभा में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी भूमिका निभाई। राज्य सरकार में मंत्री पद पर काम करने के अलावा वर्ष 2012 में उन्हें मध्य प्रदेश के चौथे राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष भी बनाया गया था।
2019 में बने लोकसभा सांसद
डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने 2019 के लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश की बालाघाट सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद वह 17वीं लोकसभा के सदस्य बने। उनका संसदीय कार्यकाल 2019 से 2024 तक रहा।
संसद में उनके कामकाज से जुड़े विषयों में ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, किसानों की समस्याएं, पर्यटन और बुनियादी सुविधाएं शामिल रहे। उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार, 17वीं लोकसभा में उनकी उपस्थिति 99 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
उत्तराखंड में निभाएंगे संवैधानिक जिम्मेदारी
राज्यपाल का पद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्यपाल संविधान के प्रावधानों के अनुरूप कार्य करते हैं और विधेयकों, विधानसभा तथा राज्य सरकार से जुड़े विभिन्न संवैधानिक मामलों में निर्धारित भूमिका निभाते हैं।
डॉ. बिसेन को मध्य प्रदेश की विधानसभा, राज्य सरकार और संसद में काम करने का अनुभव है। अब उत्तराखंड में उनकी नई जिम्मेदारी होगी। उनके अनुभव का राज्य की संवैधानिक व्यवस्था में किस प्रकार उपयोग होगा, यह पदभार संभालने के बाद सामने आएगा।
पदभार ग्रहण करने के बाद प्रभावी होगी नियुक्ति
राष्ट्रपति भवन ने 12 अक्टूबर को छह राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति से संबंधित घोषणा जारी की थी। इसी क्रम में डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। <Cite refs={[“turn778011search0″,”turn778011search1”]}/>
अब उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख पर नजर रहेगी। उनके कार्यभार संभालने के बाद उत्तराखंड में राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल औपचारिक रूप से शुरू होगा।








