नैनीताल, उत्तराखंड। जिले की ग्राम सभा बेलुवाखान को मॉडल सोलर विलेज (Model Solar Villag के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में गांव की जरूरतों के अनुसार सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार व आजीविका के अवसर मजबूत करने पर चर्चा हुई।
प्रस्तावित योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और बिजली पर होने वाले खर्च को कम करने की संभावनाएं तलाशना है। इसके साथ ही कृषि, सिंचाई और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी गतिविधियों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है।
स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण आजीविका पर रहेगा जोर
बैठक में ग्राम प्रधान डॉ. बबिता मनराल ने ग्राम सभा में सौर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि परियोजना की योजना बनाते समय स्थानीय लोगों की जरूरतों और स्वयं सहायता समूहों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने महिला समूहों और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों के लिए सौर ऊर्जा आधारित मशीनों, उपकरणों और अन्य सुविधाओं की जरूरत पर भी सुझाव दिए। ऐसी व्यवस्थाओं से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल सकते हैं और स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
कई विभागों के अधिकारियों ने बैठक में लिया हिस्सा
बेलुवाखान को मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित करने की योजना पर हुई बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में उप प्रधान मनीष कुमार, वार्ड सदस्य दिनेश आर्या, देवेंद्र सिंह रावत और शेहेनाज के साथ सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह मनराल, विक्रम आर्या और सुनील कुमार मौजूद रहे।
प्रशासनिक स्तर पर ग्राम विकास अधिकारी एलडी आर्या और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी बीना बेनवाल ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
इसके अलावा उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (UREDA), उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL), कृषि विभाग, लघु सिंचाई विभाग, सहकारी निबंधक समिति, REAP और उद्यान विभाग से जुड़े अधिकारियों व विशेषज्ञों की भागीदारी रही। विभिन्न विभागों के सहयोग से परियोजना की तकनीकी जरूरतों और संभावित उपयोगों का आकलन किया जाना है।
छह क्षेत्रों में किया गया स्थलीय निरीक्षण
बैठक के बाद प्रस्तावित सौर ऊर्जा योजनाओं की जरूरत और व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए संयुक्त टीम ने क्षेत्र का निरीक्षण किया। सर्वे के दौरान ग्राम सभा के छह प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया।
इनमें गांजा और बेलुवाखान का मुख्य बाजार क्षेत्र, बल्दियाखान और आरुखान के पर्वतीय इलाके तथा डाडर और रूसी बाईपास के आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्र शामिल रहे।
निरीक्षण का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय जरूरतों और सौर ऊर्जा के संभावित उपयोग का आकलन करना था। सर्वे से प्राप्त जानकारी के आधार पर DPR तैयार करने में मदद मिलेगी, जिससे आगे की योजना को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकेगा।
सौर ऊर्जा से बिजली खर्च घटाने और खेती को लाभ पहुंचाने की उम्मीद
मॉडल सोलर विलेज परियोजना के तहत घरेलू और सामुदायिक जरूरतों में सौर ऊर्जा के उपयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। इसके प्रभावी क्रियान्वयन से बिजली खर्च कम करने और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों के उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है। इससे किसानों को सिंचाई संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने और ऊर्जा खर्च कम करने की संभावनाएं बन सकती हैं।
हालांकि, परियोजना का वास्तविक स्वरूप, प्रस्तावित सुविधाएं और उनके क्रियान्वयन की समयसीमा DPR तैयार होने तथा संबंधित विभागों के निर्णयों के बाद स्पष्ट होगी।
अन्य गांवों के लिए भी बन सकता है उदाहरण
बेलुवाखान में मॉडल सोलर विलेज विकसित करने की पहल पर्वतीय क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों की भागीदारी और विभिन्न विभागों के समन्वय से तैयार होने वाली योजना से गांव की ऊर्जा जरूरतों के समाधान के साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
फिलहाल परियोजना की DPR तैयार करने के लिए आवश्यक जानकारियां जुटाने और क्षेत्र की जरूरतों का आकलन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अब इस बात पर नजर रहेगी कि प्रस्तावित योजना को अंतिम रूप कब मिलता है और इसे जमीन पर उतारने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।








