रीसेटलमेंट कॉलोनी से PG हब तक… 56 साल में कैसे बदल गया सत्य निकेतन?
नई दिल्ली। कभी झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया सत्य निकेतन आज दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास छात्रों के लिए एक प्रमुख ठिकाना बन चुका है। करीब छह दशक के सफर में इस इलाके का स्वरूप काफी बदल गया है। कभी रिहायशी कॉलोनी के रूप में विकसित हुआ सत्य निकेतन अब PG, कैफे, रेस्तरां और स्ट्रीट फूड के लिए भी जाना जाता है।
सत्य निकेतन को वर्ष 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए विकसित किया गया था। पुनर्वास के तहत यहां लोगों को करीब 60 से 65 वर्गमीटर तक के प्लॉट दिए गए थे। उस समय यह इलाका मुख्य रूप से रिहायशी था और यहां रहने वाले परिवारों की जरूरतों के हिसाब से मकानों का निर्माण किया गया।
समय के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की शुरुआत हुई और इसका सीधा असर सत्य निकेतन पर भी पड़ा। 1970 के दशक में साउथ कैंपस के विकसित होने के बाद इलाके में छात्रों की आवाजाही बढ़ने लगी। दिल्ली और देश के अलग-अलग हिस्सों से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों को कॉलेज के आसपास रहने के लिए जगह की जरूरत थी। सत्य निकेतन इस जरूरत के लिए एक सुविधाजनक स्थान साबित हुआ।
धीरे-धीरे यहां रिहायशी मकानों में अतिरिक्त निर्माण होने लगा और कई मकानों को छात्रों के लिए PG के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा। इसके साथ ही इलाके में दुकानों, कैफे, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार भी शुरू हो गया।
वर्ष 2011 में संपत्तियों को फ्री होल्ड किए जाने के बाद यहां निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आई। साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण सत्य निकेतन छात्रों के लिए PG का प्रमुख केंद्र बनता चला गया।
आज यहां कई स्थानीय मकान मालिकों के अलावा निजी कंपनियां भी मकान और इमारतें किराए या लीज पर लेकर छात्रों के लिए PG और हॉस्टल संचालित कर रही हैं। बाहर से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए कॉलेज के नजदीक रहने का विकल्प होने के कारण यहां PG की मांग लगातार बनी रहती है।
सत्य निकेतन की पहचान अब केवल PG तक सीमित नहीं है। इलाके में बड़ी संख्या में बजट-फ्रेंडली कैफे, रेस्तरां और स्ट्रीट फूड की दुकानें भी हैं। यही वजह है कि कॉलेज के छात्रों और युवाओं के बीच यह इलाका काफी लोकप्रिय है।
इलाके की कनेक्टिविटी भी इसकी लोकप्रियता की एक बड़ी वजह है। दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन के नजदीक होने के कारण छात्रों के लिए यहां से दिल्ली के दूसरे हिस्सों में आना-जाना आसान है।
एक समय झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया सत्य निकेतन आज छात्रों के रहने, खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी सुविधाओं का प्रमुख केंद्र बन चुका है। करीब छह दशक में हुए इस बदलाव ने सत्य निकेतन को दिल्ली के प्रमुख छात्र इलाकों में एक अलग पहचान दी है।








