हल्द्वानी। आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को हल्द्वानी के बुद्धा पार्क में कर्मचारियों ने दो दिवसीय भूख हड़ताल शुरू करते हुए केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने बैंक की हिस्सेदारी बिक्री पर रोक लगाने और सरकारी नियंत्रण बनाए रखने की मांग उठाई।
यूनाइटेड फोरम ऑफ आईडीबीआई ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के आह्वान पर 2 और 3 नवंबर को देशव्यापी आंदोलन किया जा रहा है। इसी के तहत हल्द्वानी में भी बैंक कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
निजीकरण के फैसले का किया विरोध
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि आईडीबीआई बैंक के निजीकरण से कर्मचारियों के भविष्य और उनकी सेवा शर्तों पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने बैंक में सरकारी हिस्सेदारी और सरकारी गारंटी बनाए रखने की मांग की। साथ ही बैंक का नियंत्रण निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया तत्काल रोकने की अपील की।
कांग्रेस और बैंक यूनियनों ने दिया समर्थन
कर्मचारियों के आंदोलन को कांग्रेस और अन्य बैंक कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिला। प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने वर्ष 2003 में संसद में आईडीबीआई बैंक में न्यूनतम 51 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने संबंधी आश्वासन का उल्लेख करते हुए कहा कि बैंक के स्वामित्व और नियंत्रण को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
कर्मचारियों ने उठाईं ये मांगें
आंदोलनकारियों ने बैंक में सरकारी हिस्सेदारी और गारंटी बरकरार रखने, कर्मचारियों की सेवा शर्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्रस्तावित निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि बैंक के भविष्य से जुड़े फैसलों में उनके हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
दो दिवसीय आंदोलन के माध्यम से कर्मचारियों ने केंद्र सरकार और एलआईसी तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित प्रबंधन की ओर से इस विरोध पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
चेतना न्यूज़ | हल्द्वानी







