हल्द्वानी। उत्तराखंड की धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन की पहचान अब चारधाम तक सीमित नहीं रह गई है। पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में स्थित आदि कैलास और ओम पर्वत भी देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में यहां आने वाले यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अक्टूबर 2023 की आदि कैलास यात्रा के बाद इस धार्मिक स्थल को देशभर में नई पहचान मिली और पर्यटन गतिविधियों में तेजी देखने को मिली।
तीन वर्षों में तेजी से बढ़ा यात्रियों का रुझान
आदि कैलास यात्रा के आंकड़े इस बढ़ती लोकप्रियता की कहानी बयां कर रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 2023 में यहां 10,079 यात्रियों ने पहुंचकर दर्शन किए थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 29,423 और 2025 में 31,558 तक पहुंच गई। वहीं, अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष अब तक 61,950 इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके थे।
यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि आदि कैलास अब धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता और रोमांचक यात्रा पसंद करने वाले लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो रहा है।
सीमांत गांवों के लिए रोजगार के नए अवसर
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से धारचूला, गुंजी और आसपास के सीमांत गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। होटल, होमस्टे, टैक्सी, स्थानीय रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को इसका लाभ मिल रहा है।
पर्यटन गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहीं तो स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, वाहन चालक, होटल प्रबंधन, होमस्टे संचालन और स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे सीमांत क्षेत्रों में आजीविका के साधन मजबूत करने और पलायन की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है।
पर्यटन से सरकार और स्थानीय कारोबार को फायदा
आदि कैलास यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण बनती जा रही है। यात्रा के दौरान परमिट, चिकित्सा शुल्क और अन्य व्यवस्थाओं से सरकारी राजस्व प्राप्त होता है। वहीं यात्रियों के ठहरने, परिवहन और खानपान पर होने वाले खर्च से स्थानीय कारोबार को गति मिलती है।
जून 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, यात्रा के शुरुआती 33 दिनों में इनर लाइन परमिट और चिकित्सा शुल्क से लगभग 1.8 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
बढ़ती भीड़ के साथ सुविधाओं की चुनौती
आदि कैलास की लोकप्रियता बढ़ने के साथ पर्यटन प्रबंधन की चुनौतियां भी सामने आने लगी हैं। हाल के दिनों में यहां वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की समस्या भी सामने आई है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण, सुरक्षित पार्किंग और यातायात प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
इसके अलावा ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं, ऑक्सीजन, आपातकालीन चिकित्सा सहायता, एंबुलेंस, स्वच्छ पेयजल और शौचालय की बेहतर व्यवस्था जरूरी है। हिमालय के इस संवेदनशील पर्यावरण को देखते हुए कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी पर्यटन विकास की प्राथमिकता होनी चाहिए।
चारधाम यात्रा भी बना रही नए रिकॉर्ड
उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन का विस्तार चारधाम यात्रा के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। वर्ष 2024 में लगभग 48.01 लाख और 2025 में 51.06 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए थे। वहीं, 15 अक्टूबर 2026 तक 59.08 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धाम पहुंच चुके थे।
बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए 177 एंबुलेंस, 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट और 33 स्वास्थ्य जांच केंद्रों की व्यवस्था की थी।
आदि कैलास बन सकता है उत्तराखंड की पर्यटन अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार
आदि कैलास और ओम पर्वत की बढ़ती लोकप्रियता उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। जरूरत इस बात की है कि पर्यटन को केवल यात्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि स्थानीय लोगों की भागीदारी, रोजगार, बेहतर बुनियादी सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए।
यदि योजनाबद्ध तरीके से इन क्षेत्रों का विकास किया जाता है तो आदि कैलास आने वाले समय में उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
चेतना न्यूज़ | उत्तराखंड







