उपनल कर्मियों से जबरन अनुबंध कराने का आरोप, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब वेतन रोकने और सेवा में ब्रेक देने का भी आरोप, मामले

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वेतन रोकने और सेवा में ब्रेक देने का भी आरोप, मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को

नैनीताल। उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों से अनुबंध पत्र भरवाने के मामले ने अब हाईकोर्ट का रुख कर लिया है। उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ की ओर से अदालत में आरोप लगाया गया कि सरकार कर्मचारियों से जबरन अनुबंध करवा रही है। जो कर्मचारी अनुबंध पत्र नहीं भर रहे हैं, उनके वेतन में कटौती की जा रही है या सेवा में ब्रेक दिया जा रहा है।

हाईकोर्ट में गुरुवार को उपनल कर्मचारी संघ की अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ के समक्ष संघ की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार कर्मचारियों से अनुबंध पत्र भरने के लिए दबाव बना रही है। आरोप है कि इसका पालन नहीं करने वाले कर्मचारियों को वेतन तक नहीं दिया जा रहा है।

संघ की ओर से यह भी कहा गया कि कुछ कर्मचारियों के पहले से दिए गए वेतन से कटौती की गई है और कुछ को सेवा से आकस्मिक ब्रेक दिया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के बॉन्ड से जुड़े आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले में शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से समय मांगा। कोर्ट ने सरकार को समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की है।

मामला पहले से चले आ रहे न्यायालय के आदेश के अनुपालन से भी जुड़ा है। कर्मचारी संघ का आरोप है कि पिछले करीब एक साल से सरकार की ओर से अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है और बार-बार अतिरिक्त समय मांगा जा रहा है। इसे लेकर प्रदेशभर के उपनल कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है।

अब अगली सुनवाई में सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब पर सभी की नजरें रहेंगी। वहीं उपनल कर्मचारी संघ को उम्मीद है कि अदालत कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश देगी।

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Author: Chetna News

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