भीमताल/हल्द्वानी। कुमाऊं क्षेत्र के श्रद्धालुओं और अनुयायियों के बीच सम्मानित संत स्वामी परमानन्द पुरी महाराज का 1 अक्टूबर 2026 की रात हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद पदमपुरी सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक का माहौल है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
स्वामी परमानन्द पुरी महाराज लंबे समय से आध्यात्मिक साधना और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहे। पदमपुरी क्षेत्र में उनके प्रति लोगों की विशेष आस्था रही है। उनके निधन की सूचना मिलने के बाद बुधवार को कई श्रद्धालु और अनुयायी अंतिम दर्शन के लिए हल्द्वानी पहुंचे।
सादगी और साधना के लिए श्रद्धालुओं के बीच रहे चर्चित
स्वामी परमानन्द पुरी महाराज का जीवन साधना, अनुशासन और आध्यात्मिक चिंतन से जुड़ा रहा। उनके अनुयायियों के अनुसार, वह नियमित रूप से कई घंटे पूजा, ध्यान और साधना में बिताते थे।
उनके जीवन से जुड़ी जानकारी के अनुसार उन्होंने लंबे समय तक कठिन साधना का पालन किया। उनके बारे में यह भी बताया जाता है कि जीवन के एक लंबे दौर में उन्होंने फलाहार को ही अपना मुख्य आहार बनाया। हालांकि उनके जीवन से जुड़ी कुछ जानकारियां अलग-अलग स्रोतों में अलग रूप में मिलती हैं।
कश्मीर से बताया जाता है पारिवारिक संबंध
स्वामी जी के शुरुआती जीवन को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका संबंध कश्मीर के एक ब्राह्मण परिवार से बताया जाता है। उनके परिवार का कुछ समय विदेश में भी रहा। शिक्षा पूरी करने के बाद वह भारत आए और सरकारी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े।
बाद में नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र से उनका गहरा जुड़ाव हुआ। इसी दौरान उन्होंने सांसारिक जीवन से दूरी बनाकर आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया। इसके बाद उनका अधिकांश जीवन साधना और धार्मिक गतिविधियों में बीता।
कई भाषाओं के जानकार होने की भी चर्चा
अनुयायियों के बीच स्वामी परमानन्द पुरी महाराज को अध्ययनशील संत के रूप में भी याद किया जाता है। उनके बारे में बताया जाता है कि उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था और विभिन्न विषयों में उनकी गहरी रुचि थी।
उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आज भी उनके अनुयायियों के बीच चर्चा का विषय हैं। पदमपुरी और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से उनके प्रति श्रद्धा का भाव रहा है।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताया दुख
स्वामी परमानन्द पुरी महाराज के निधन पर पूर्व सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी सहित कई जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने शोक व्यक्त किया।
श्रद्धालुओं ने कहा कि स्वामी जी का जीवन आध्यात्मिक साधना और सादगी से जुड़ा रहा। उनके निधन को क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति बताते हुए लोगों ने उनकी स्मृतियों को याद किया।
स्वामी परमानन्द पुरी महाराज के निधन से पदमपुरी और कुमाऊं क्षेत्र में उनके अनुयायियों के बीच शोक की लहर है। श्रद्धालु उन्हें उनकी साधना, सादगी और आध्यात्मिक जीवन के लिए लंबे समय तक याद करते रहेंगे।
नोट: स्वामी परमानन्द पुरी महाराज के जीवन, आयु और प्रारंभिक जीवन से संबंधित कुछ विवरण विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग मिलते हैं। इसलिए CHETNA NEWS द्वारा प्रकाशित जानकारी में पुष्ट तथ्यों को प्राथमिकता दी गई है।









