टाइगर वापस आया है या नहीं?

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

Share Now:

सवाल यह है कि क्या जंगल अब भी उसे उसी तरह स्वीकार करने के लिए तैयार है?

क्योंकि टाइगर की सबसे बड़ी ताकत उसकी उम्र नहीं होती, उसका जंगल में भरोसा होता है।

जिस टाइगर को अपने ही पुराने जंगल से नए जंगलों की ओर जाना पड़े,
जिसे हर चुनाव में नई जमीन तलाशनी पड़े,
जिसकी अपनी पार्टी उसके लिए सीट बदलती रहे,
जिसके मुख्यमंत्री रहते अपनी ही पार्टी के विधायक बगावत कर दें,
और जिसे अपने राजनीतिक जीवन के एक दौर में दो-दो सीटों से लड़कर भी विधानसभा में प्रवेश न मिल पाए—

उसे देखकर सवाल दहाड़ का नहीं, जनाधार का उठता है।

व्यंग्य यही है कि जंगल में टाइगर बूढ़ा होने से खत्म नहीं होता। बूढ़ा टाइगर भी सम्मानित होता है। वह बच्चों को शिकार करना सिखा सकता है, जंगल के रास्ते बता सकता है और अपनी पुरानी कहानियाँ सुना सकता है।

मुश्किल तब होती है, जब बूढ़ा टाइगर यह मानने को तैयार न हो कि अब जंगल को उसकी दहाड़ से ज्यादा नई पीढ़ी के कदमों की जरूरत है।

राजनीति में सबसे कठिन काम पद छोड़ना नहीं है।

सबसे कठिन काम है यह समझ लेना कि समय अब आपको किस भूमिका में देखना चाहता है।

और इसलिए पोस्टर लगाने वालों से बस इतना कहना है—

“Tiger is Back” लिखने में कोई हर्ज नहीं।

लेकिन अगली पंक्ति भी लिख दीजिए—

“अब देखना यह है कि जंगल उसे पहचानता भी है या नहीं।”

Chetna News
Author: Chetna News

Leave a Comment

और पढ़ें

traffic tail