हल्द्वानी। अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट दिवस के अवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में AI के दौर में पॉडकास्टिंग के बदलते स्वरूप और भविष्य को लेकर एक वेबिनार आयोजित किया गया। पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा और सामुदायिक रेडियो ‘हैलो हल्द्वानी 91.2 FM’ के संयुक्त आयोजन में डिजिटल कथावाचन, विश्वसनीयता और समावेशी संचार जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की शुरुआत पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा के निदेशक प्रो. राकेश चन्द्र रयाल के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पॉडकास्टिंग ने डिजिटल मीडिया में अपनी अलग जगह बनाई है। मोबाइल और इंटरनेट की पहुंच बढ़ने के साथ लोग अपनी पसंद के विषयों को अपनी सुविधा के अनुसार सुनना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में पॉडकास्ट के क्षेत्र में AI के इस्तेमाल से नई संभावनाएं भी सामने आई हैं।
पॉडकास्ट निर्माण में AI की भूमिका पर चर्चा
वेबिनार के मुख्य वक्ता भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर प्रो. हेमंत जोशी रहे। उन्होंने रेडियो से लेकर फिल्म, टेलीविजन और वर्तमान डिजिटल प्लेटफॉर्म तक मीडिया के बदलते सफर पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि पॉडकास्ट तैयार करने के कई तकनीकी चरणों में AI मददगार साबित हो सकता है। रिकॉर्डिंग, ऑडियो एडिटिंग और अन्य तकनीकी कामों को आसान बनाने में AI आधारित टूल उपयोगी हो सकते हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का इस्तेमाल मानवीय सोच और संपादकीय समझ का विकल्प नहीं बनना चाहिए।
तथ्य-जांच और संपादकीय निगरानी जरूरी
प्रो. हेमंत जोशी ने कहा कि AI से तैयार या AI की मदद से तैयार की गई सामग्री में तथ्य-जांच और मानवीय समीक्षा बेहद जरूरी है। पॉडकास्ट की प्रभावशीलता केवल तकनीकी गुणवत्ता से नहीं, बल्कि उसकी भाषा, प्रस्तुति, संवेदनशीलता और श्रोताओं के साथ बनने वाले संवाद से भी तय होती है।
उन्होंने कहा कि पॉडकास्टिंग में रचनात्मकता, मानवीय संवेदना और विश्वसनीयता को बनाए रखना आवश्यक है। AI को एक सहायक तकनीक के रूप में इस्तेमाल करते हुए अंतिम सामग्री की जिम्मेदारी मानव संपादकीय टीम के पास रहनी चाहिए।
शोधार्थियों ने पूछे सवाल
वेबिनार के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और शिक्षार्थियों ने AI आधारित मीडिया उत्पादन, पॉडकास्ट तैयार करने की प्रक्रिया और डिजिटल संचार के भविष्य से जुड़े सवाल पूछे।
प्रो. हेमंत जोशी ने प्रतिभागियों के सवालों का जवाब देते हुए पॉडकास्टिंग के बदलते परिदृश्य और नई तकनीकों के उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।
कुलपति ने की ‘हैलो हल्द्वानी’ की पहल की सराहना
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में सामुदायिक रेडियो ‘हैलो हल्द्वानी 91.2 FM’ की पॉडकास्टिंग पहल की सराहना की। उन्होंने प्रो. हेमंत जोशी को भविष्य में इस पहल से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया।
कुलपति ने वेबिनार के आयोजन के लिए आयोजकों और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि मीडिया और तकनीक के बदलते दौर में ऐसे संवाद विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उपयोगी साबित होते हैं।
इनकी रही कार्यक्रम में भूमिका
कार्यक्रम का संचालन सहायक प्राध्यापिका हर्षिता मेहता ने किया। वहीं ‘हैलो हल्द्वानी 91.2 FM’ के अनिल नैलवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
वेबिनार में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और शिक्षार्थी शामिल हुए। कार्यक्रम में पॉडकास्टिंग के वर्तमान स्वरूप के साथ-साथ AI के बढ़ते प्रभाव और डिजिटल मीडिया में मानवीय भूमिका को लेकर विचार साझा किए गए।








