“विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही सरकार: मुख्यमंत्री
धार्मिक पर्यटन से युवाओं को रोजगार, मातृशक्ति को अवसर और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार
नैनीताल, 22 सितंबर 2026 (सू.वि.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को नैनीताल में आयोजित मां नंदा-सुनंदा महोत्सव में प्रतिभाग किया। उन्होंने मां नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन कर प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस दौरान उन्होंने महोत्सव में मौजूद माताओं-बहनों, वरिष्ठजनों, युवाओं और बच्चों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां नंदा-सुनंदा की छत्रछाया में उपस्थित होना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है। मंगलवार के अवसर पर उन्होंने पवनपुत्र हनुमान जी को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हनुमान जी ने माता सीता का संदेश प्रभु श्रीराम तक पहुंचाया, उसी प्रकार वे सभी का प्रणाम प्रभु श्रीराम के चरणों तक पहुंचाएं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह के साथ “जय श्रीराम” का जयघोष भी किया।
नंदा देवी महोत्सव आस्था, संस्कृति और परंपराओं का उत्सव
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव कोई सामान्य मेला या उत्सव नहीं है। यह हमारी आस्था, उत्तराखंड की संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का उत्सव है। मां नंदा-सुनंदा के स्वागत की परंपरा, लोकगीत, झोड़ा-चांचरी, ढोल-दमाऊं सहित लोक संस्कृति की विभिन्न परंपराएं इस महोत्सव के माध्यम से जीवंत होती हैं।
उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी जड़ों और अपनी संस्कृति पर गर्व होता है, वही समाज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।
नैनीताल केवल पर्यटन नगरी नहीं, आस्था और अध्यात्म की भी भूमि
मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल को दुनिया उसकी खूबसूरत झील, पहाड़ों और हरी-भरी वादियों के लिए जानती है, लेकिन नैनीताल केवल पर्यटन नगरी ही नहीं है। यह आस्था और अध्यात्म की भी भूमि है।
उन्होंने कहा कि यहां मां नैना देवी का पावन धाम है। हनुमानगढ़ी में बजरंगबली विराजमान हैं, जबकि कैंची धाम बाबा नीब करौरी महाराज की तपोभूमि है। वहीं, मुक्तेश्वर में देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद मिलता है। प्रकृति और अध्यात्म का यह अद्भुत संगम नैनीताल को विशिष्ट पहचान देता है।
देश में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मिल रही नई पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संवारने का कार्य किया जा रहा है। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हुए विकास कार्यों ने आस्था के प्रमुख केंद्रों को नई पहचान दी है।
उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ उत्तराखंड सरकार भी “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ देवभूमि को आगे बढ़ा रही है।








