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इंदौर 7 जनवरी【 चेतना न्यूज़ 】 दिनांक 8 जनवरी 2020 -- स्वतंत्रता सेनानी चन्द्रभान शरण सिंह के चचेरे पौत्र बृजभूषण शरण सिंह जी का आज जन्मदिन है | बृजभूषण शरण सिंह जी को उनके जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं । ईश्वर आप को अपार यश, बहुत लम्बी उम्र और अच्छा स्वास्थ प्रदान करे । बृजभूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष हैं और इनके नेतृत्व में आज भारतीय कुश्ती बुलंदियों को छू रही है आज पूरे विश्व में भारतीय कुश्ती का डंका बज रहा है उसके पीछे कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह जी का अथक प्रयास है । भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह भारतीय जनता पार्टी से सोलहवीं लोक सभा के लिए कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र से वर्तमान में संसद भी सदस्य हैं | वे अबतक पांच बार लोकसभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। वर्तमान में आप भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी हैं | जीवन परिचय स्वतंत्रता सेनानी चन्द्रभान शरण सिंह के चचेरे पौत्र बृजभूषण शरण सिंह राजनीति अपने खून में लेकर पैदा हुए। उनके बाबा विधायक थे। 6 भाई का भरा पूरा परिवार गाँव बिसनोहरपुर (गोंडा) उत्तर प्रदेश में रहता था। बृजभूषण शरण सिंह की प्रारंभिक शिक्षा कुन्दौली, देवरिया में मामा के घर पर रहकर हुई। बचपन से ही बृजभूषण जी को अपनी तंदरुस्ती से लगाव था। वो रोज सुबह उठकर घुड़सवारी, दौड़ लगाना, योग, व्यायाम करना एवं कुश्ती खेल करते थे। यही शौक धीरे धीरे बढ़ता गया और कुश्ती में इनकी रूचि बढ़ती गई | बृजभूषण शरण जी जब केवल 16 वर्ष के थे तो पारिवारिक दुश्मनी के चलते 1974 में पटीदारो द्वारा उनका घर गिरा दिया गया। इस घटना से युवा अवस्था के बृजभूषण शरण सिंह पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा और समाज सेवा की भावना मन में उत्पन्न हो गयी। इसी दौरान गर्मी की छुट्टियों में वो अपने गांव आये हुए थे तो कॉलेज में दाखिला लेने के उद्देश्य से साकेत महाविद्यालय घूमने गए। वह एक घटना घटी जिससे उनके समाज सेवी जीवन की शुरुआत हो गई। वहाँ कुछ लड़के लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे थे। यह देख कर नवयुवक आ खड़े हुए और दो दो हाथ तक करने की नोबत आ गई। सभी शरारती लड़को को मुह तोड़ जवाब देते हुए लड़कियो की आस्मिता को बचाया। फिर क्या था, छात्रों में प्रिय नौजवान बृजभूषण शरण सिंह देखते ही देखते छात्र नेता बन गए। युवाओं का एक बड़ा जन सैलाब उनके साथ हो चला। और 1979 में भरी रिकॉर्ड के साथ छात्र संघ चुनाव में जीत हासिल की | सम्पूर्ण पूर्वांचल के 8-10 जिलो में युवा पहलवान के नाम का एक शोर सा मच गया। कुश्ती हो या दंगल, दौड़ हो या घुड़सवारी, गांव गांव में बृजभूषण शरण के नाम का शोर हो गया। उसी बीच 1980 में केतकी देवी से विवाह माता पिता ने तय कर दिया राजनैतिक जीवन। राजा गोंडा ने इनको राजनीति में सक्रिय रूप से आने की सलाह दी। ओजस्वी विचारो से ओत-प्रोत बृजभूषण शरण सिंह ने 1987 में गन्ना समिति के अध्यक्ष का प्रथम चुनाव लड़ा। वर्ष 988 में दूसरा चुनाव ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ा जिसमे उनको 33 में से 27 रिकॉर्ड तोड़ वोट से जीत हासिल हुई। वर्ष 1991 में विधान परिषद् सदस्य के चुनाव लड़ने की मन में ठानी। उसी समय गोंडा के राजा ने इनको एक सलाह दी की आप भातीय जनता पार्टी से चुनाव लड़ो। हो सकता है कि आप चुनाव हार जाये लेकिन आपके अंदर जो हिंदुत्व सेवा भाव है उसको बल मिलेगा। बड़े जोर शोर से विधान परिषद् चुनाव लड़ा और मात्रा 14 वोट से ये चुनाव हार गए लेकिन’ वो हार कोई साधारण हार नहीं थी वही प्रिय जननेता का जन्म हुआ | उसी दौरान रामजन्म भूमि आंदोलन जोर पकड़ रहा था। बृजभूषण जी ने आडवानी जी के साथ आंदोलन को संभाला और फिर क्या था इनके नाम का डंका बज गया। भारतीय जनता पार्टी ने 1991 में दसवीं लोकसभा से राज आनंद सिंह के खिलाफ बृजभूषण शरण सिंह को चुनाव लड़ने के लिए जोर दिया। 13000 वोट से एक ओजस्वी पहलवान ने हराया। 1993 में पुनः रामजन्मभूमि आंदोलन ने जोर पकड़ा और नेता जी के नाम से प्रख्यात बृजभूषण जी ने रामलला के मंदिर की खातिर अपनी राजनैतिक , सामाजिक , पारिवारिक जीवन से कुछ वक्त के लिए विराम लिया जेल को रामलला का प्रशाद समझकर स्वीकार किया और खुद को क्राइम ब्रांच के हवाले’ कर दिया | इसी बीच अनेक राजनैतिक षडयंत्रो के चलते इनको अनेक मुकदमो में फसाया गया। चीनी घोटाले में इनका नाम झूठा शामिल किया गया। सभी दोषियों को सजा हुई और बृजभूषण शरण को बाइज़्ज़त बरी किया गया। 1996 में बृजभूषण शरण जी की पत्नी श्रीमती केतकी देवी ने राजनीति में आने का फैसला किया और पुनः श्री आनंद सिंह को भारी मतों से हराकर केतकी देवी विजयी हई | वर्ष 1999 में बृजभूषण शरण सिंह ने तथाकथित बाहुबली रिज़वान खान को 77000 वोट से हराकर जीत हासिल की। पुनः 2004 में चौदहवी लोक सभा में बृजभूषण शरण सिंह ने जीत हासिल की। इसी बीच बसपा सुप्रीमो मायावती जी गोंडा का नाम बदलकर रखना चाहती थी। लेकिन बृजभूषण शरण सिंह ने भारी जन सैलाभ के बीच उनका पुर जोर विरोध किया और वही से यह आंदोलन बढ़ता चला गया।आखिर इनकी मेहनत रंग लाई। और गोंडा का नाम नहीं बदला गया | वर्ष 2009 में समाजवादी पार्टी से 63000 वोट से दुबारा अपनी लोकप्रियता के चलते बृजभूषण ने विजय हासिल की। पुनः 2014 में भारतीय जनता पार्टी के आग्रह पर केसरगंज पुर से 73000 वोट से विनोद कुमार सिंह को शिखस्त देकर भारी बहुमत से विजय हासिल की. कुश्ती के क्षेत्र में योगदान निरोगी काया विचारधारा वाले बृजभूषण शरण सिंह को बचपन से ही तैराकी, घुड़सवारी, कुश्ती का शौक रहा 10 वर्ष की अवस्था से अपने घर में अखाडा बनवाकर कुश्ती का अभ्यास शुरू किआ। जैसे जैसे वो बड़े होते गए इन्होंने आस पास के युवाओ को भी कुश्ती से जोड़ना शुरू किया। यहाँ तक की अपनी पुश्तैनी दुश्मनी को भी कुश्ती से ख़त्म कर दिया। जो लोग इनके परिवार को अपना दुश्मन मानते थे वो इनके अखाड़े में दो दो हाथ करने आने लगे। पुरे अवध, पूर्वांचल में पहलवान बृजभूषण के नाम का डंक बज गया। इन्होंने नैरा दिया अगर समाज को स्वस्थ बनाना है तो पहले स्वयं को स्वस्थ बनाओ -"कुश्ती अपनाओ"। "स्वस्थ गोंडा" की मुहीम को बच्चे बच्चे के अंदर पैदा किया। वे उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष बने। उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती को बल दिया। 2008 में अंतरराष्ट्रीय कुश्ती संघ के अध्यख बने। ओलंपिक में 3 मैडल कुश्ती के क्षेत्र से आये। खिलाड़ियो की सभी छोटी बड़ी समस्याओं को सुलझाने में लगे रहने वाले नेताजी कुश्ती में लोकप्रिय हो गए। 8000 से भी ज्यादा पहलवान अब तक कुश्ती के क्षेत्र में बृजभूषण शरण सिंह के नेतृत्व में बढ़ चुके हैं। युवाओं को खेल की ओर अग्रसर करने के साथ-साथ उनको खेलो से सम्बंधित सामग्री निशुल्क बाँटते हैं।


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